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तुलसीदासजी की दीनता और श्री राम भक्तिमयी कविता की महिमा – Tulsidas ji’s humility
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📙 BalKand
📖 Episode: तुलसीदासजी की दीनता और श्री राम भक्तिमयी कविता की महिमा – Tulsidas ji’s humility
✨ Type: Chaupai
🔢 Doha: 10
📿 Navah Day 1
📅 Maas Day 1
Chaupai 4
जदपि कबित रस एकउ नाहीं। राम प्रताप प्रगट एहि माहीं॥
सोइ भरोस मोरें मन आवा। केहिं न सुसंग बड़प्पनु पावा॥4॥
सोइ भरोस मोरें मन आवा। केहिं न सुसंग बड़प्पनु पावा॥4॥
Hindi Meaning
"यद्यपि मेरी इस रचना में कविता का एक भी रस नहीं है, तथापि इसमें श्री रामजी का प्रताप प्रकट है। मेरे मन में यही एक भरोसा है। भले संग से भला, किसने बड़प्पन नहीं पाया?॥4॥"
English Meaning
"Though my poem lacks poetic excellence, it carries the glory of Lord Ram. I hold a firm belief in my heart, after all, who has not been elevated by good company?"
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